महिला से बातचीत में उसने बताया कि रात्रि के समय वह सीटी कोतवाली मुंगेली परिसर में बने प्रतीक्षालय में विश्राम करती है। सुबह भगवान परशुराम चौक स्थित प्रतिमा स्थल की साफ-सफाई करने के बाद उसे भोजन उपलब्ध हो जाता है। महिला ने यह भी जानकारी दी कि वह थाना परिसर के पीछे स्थित श्मशान घाट क्षेत्र के आसपास रहती है, जहाँ उसे असुरक्षा और भय का अनुभव होता है।
वृद्ध महिला ने बताई रोशनी कम दिखाई देती है यानी दृष्टि कमजोर होने की भी जानकारी मिली है। परिवार के संबंध में पूछे जाने पर उसने बताया कि उसके परिजन बिलासपुर एवं नागपुर में रहते हैं, किंतु उसने किसी का नाम या पता साझा नहीं किया। स्थानीय लोगों के अनुसार महिला यहाँ की स्थायी निवासी नहीं है और किसी अन्य स्थान से आई प्रतीत होती है।
पास के भोजनालय की संचालिका ने बताया कि वह रोज़ शाम को मानवता के नाते महिला को भोजन उपलब्ध कराती हैं, लेकिन उसके निवास अथवा पारिवारिक स्थिति की कोई जानकारी उन्हें नहीं है।
स्थानीय नागरिकों से मिली जानकारी के अनुसार महिला कभी-कभी भूख या थकान की स्थिति में स्वयं से बातें करती हुई दिखाई देती है। यह भी बताया गया कि महिला की चिकित्सकीय जांच करवाई गई थी, जिसमें वह मानसिक रूप से सामान्य पाई गई। हालांकि वृद्धाश्रम में रहने के प्रस्ताव को उसने स्वीकार नहीं किया।
यह मामला शहर में बेसहारा वृद्धों की स्थिति, उनके पुनर्वास और सामाजिक सुरक्षा की आवश्यकता को रेखांकित करता है। संबंधित विभागों और समाजसेवी संगठनों की सक्रियता से ऐसे लोगों को सुरक्षित जीवन उपलब्ध कराए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। उल्लेखनीय है कि उपरोक्त जानकारी आसपास के लोगों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि हिंदुस्तान दृष्टि द्वारा नहीं की गई है।
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