मुंगेली । हिंदुस्तान दृष्टि । मंचों से लोकतंत्र, सुशासन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बड़ी-बड़ी बातें जरूर की जाती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहलाने वाले पत्रकार आज भी अपनी मूलभूत सुविधाओं और सम्मान के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मुंगेली आगमन के दौरान पत्रकारों का वर्षों पुराना दर्द खुलकर सामने आ गया। मुंगेली प्रेस क्लब अध्यक्ष अनिल सोनी और सचिव योगेश शर्मा के नेतृत्व में पत्रकारों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर पत्रकारों की समस्याओं को रखा। पत्रकारों ने कहा कि वे दिन-रात अपनी जान जोखिम में डालकर जनता और सरकार के बीच सच्चाई पहुंचाने का काम करते हैं, लेकिन जब पत्रकारों के हितों की बात आती है, तब सिर्फ आश्वासन ही मिलते हैं। पत्रकारों ने मांग की कि पत्रकारों के आवास के लिए पत्रकार कॉलोनी हेतु भूमि आबंटित की जाए, प्रेस कॉम्प्लेक्स बनाया जाए, अधिमान्य पत्रकारों को रेलवे में मिलने वाली छूट सुविधा बहाल की जाए और स्वास्थ्य सहित अन्य सुविधाओं में बढ़ोतरी की जाए। पत्रकारों का कहना था कि सरकारें हर कार्यक्रम में मीडिया की मौजूदगी चाहती हैं, लेकिन पत्रकारों के जीवन, सुरक्षा और भविष्य को लेकर गंभीरता नहीं दिखती। पत्रकारों के बीच इस बात को लेकर भी नाराजगी दिखाई दी कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों के बड़े दौरों में करोड़ों रुपये के आयोजन और प्रचार-प्रसार तो किए जाते हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर वर्षों से काम कर रहे पत्रकारों और क्षेत्रीय मीडिया संस्थानों को विज्ञापन तक नहीं मिल पाता। कई पत्रकारों का कहना था कि सरकार को कवरेज तो चाहिए, लेकिन जमीनी पत्रकारों के आर्थिक संघर्ष और अस्तित्व की चिंता शायद नहीं दिखाई देती।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर लोकतंत्र की आवाज उठाने वाले पत्रकार ही क्यों उपेक्षा का शिकार हैं? ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले कई पत्रकार बेहद सीमित संसाधनों में काम करने को मजबूर हैं। कई पत्रकारों के पास न स्थायी कार्यालय है, न सुरक्षा और न ही कोई मजबूत सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था। इसके बावजूद वही पत्रकार भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और जनता की समस्याओं को सामने लाने का काम करते हैं। मुख्यमंत्री के सामने उठी यह मांग सिर्फ सुविधाओं की मांग नहीं थी, बल्कि यह उस व्यवस्था पर सवाल था जो पत्रकारों से हर समय जवाबदेही चाहती है, लेकिन पत्रकारों के अधिकारों और सम्मान को लेकर संवेदनशील नजर नहीं आती। यदि सरकार वास्तव में लोकतंत्र को मजबूत करना चाहती है, तो पत्रकारों को केवल कवरेज का माध्यम नहीं बल्कि लोकतंत्र के मजबूत स्तंभ के रूप में सम्मान और सुरक्षा भी देनी होगी। इस दौरान अनिल सोनी, योगेश शर्मा, सुनील पाठक, भूपेंद्र सिंह, मनीष शर्मा, जय ताम्रकार, प्रमोद पाठक, प्रशांत शर्मा, रोहित कश्यप, अनिल पात्रे, निखिलेश लाल, आनंद गुप्ता, परमेश्वर कुर्रे, अतुल श्रीवास्तव, विनोद रायसागर, राजेश खन्ना, रजनीश सिंह, नीलकमल सिंह, सुभाशु शुक्ला, सुरेश पाटले, अरविन्द बंजारा, दुर्गा तिवारी, सदा राम कश्यप सहित बड़ी संख्या में पत्रकार उपस्थित रहे।
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