रायपुर । हिंदुस्तान दृष्टि । बिलासपुर संभाग के मुंगेली जिले के पथरिया क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत चंदली के रहने वाले राजकुमार सतनामी आज संघर्ष, समाज सेवा और नेतृत्व क्षमता की मिसाल बन चुके हैं। बेहद गरीब परिवार में जन्मे राजकुमार ने कठिन परिस्थितियों से लड़ते हुए ऐसा मुकाम हासिल किया, जिसे लोग केवल सपनों में सोचते हैं। उनका नाम विश्व के सबसे कम उम्र के गरीब सामाजिक कार्यकर्ता और प्रदेश अध्यक्ष के रूप में London Book of World Records में दर्ज किया जा चुका है और वर्ष 2026 में दूसरी बार उन्हें विश्व रिकॉर्ड सम्मान मिलने जा रहा है।
राजकुमार सतनामी का बचपन अभावों और संघर्षों के बीच गुजरा। आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि कई बार पढ़ाई के लिए कॉपी-पेन तक उपलब्ध नहीं होते थे। खेतों में मजदूरी कर पैसे जुटाना और उसी पैसे से पढ़ाई करना उनकी दिनचर्या बन चुकी थी। वे फटे-पुराने कपड़ों में स्कूल जाया करते थे। उनकी हालत देखकर गांव की शिक्षिका सरिता मरावी भावुक हो जाती थीं। उन्होंने राजकुमार को कई बार स्कूल ड्रेस उपलब्ध कराई और हमेशा उन्हें जीवन में बड़ा नाम करने के लिए प्रेरित किया। राजकुमार के जीवन में शिक्षक लक्ष्मीकांत ध्रुव का भी विशेष योगदान रहा। वे बच्चों को शिक्षा का महत्व समझाते हुए कहा करते थे कि शिक्षा ही इंसान को ऊंचे पद तक पहुंचाती है। शिक्षक की यही बातें राजकुमार के जीवन की प्रेरणा बनीं और उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद पढ़ाई जारी रखी। बाद में उन्होंने बीएससी और पत्रकारिता की शिक्षा प्राप्त की। राजकुमार बताते हैं कि बचपन में परिवार की हालत इतनी खराब थी कि कई बार घर में सब्जी तक नहीं होती थी। दादाजी चावल के साथ आलू उबालकर नमक-मिर्च में मिलाकर पूरा परिवार भोजन करता था। इसके बावजूद उन्होंने कभी हालात के आगे हार नहीं मानी। सातवीं कक्षा में परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ने पर उन्होंने किराए की साइकिल लेकर गांव-गांव बर्फ बेचने का काम शुरू किया और उसी पैसे से अपनी पढ़ाई जारी रखी। बचपन से ही राजकुमार अन्याय और अव्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाते रहे। स्कूल और गांव की समस्याओं को लेकर वे शिक्षकों और जनप्रतिनिधियों से सवाल करते थे। पथरिया क्षेत्र में स्कूल जाने वाले खराब रास्ते को लेकर उन्होंने साथियों के साथ आंदोलन की चेतावनी दी थी। यहीं से उनके आंदोलनकारी जीवन की शुरुआत हुई। करीब 14 वर्ष की उम्र में वे मजदूरी करने रायपुर पहुंचे और बाद में आगे की पढ़ाई के लिए तखतपुर गए। गरीबी और जिम्मेदारियों के बावजूद उन्होंने शिक्षा और समाज सेवा का रास्ता नहीं छोड़ा। कम उम्र में ही उनकी नेतृत्व क्षमता सामने आने लगी। 20 वर्ष की उम्र में वे सतनामी समाज छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिला अध्यक्ष बने। इसके बाद युवा प्रकोष्ठ में प्रदेश प्रवक्ता, 21 वर्ष की उम्र में प्रदेश महासचिव (आईटी सेल) और 23 वर्ष की उम्र में छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति उत्थान संघ के प्रदेश अध्यक्ष बने। साल 2024 में बलौदा बाजार आगजनी और कलेक्टोरेट घटना मामले में उन्हें मुख्य आरोपी बनाकर गिरफ्तार किया गया था और करीब 9 महीने तक बिलासपुर केंद्रीय जेल में रहना पड़ा। हालांकि जेल से बाहर आने के बाद भी उन्होंने समाज हित के कार्य और सामाजिक आंदोलन जारी रखे। राजकुमार सतनामी के संघर्ष, समाज सेवा और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उनका नाम London Book of World Records में दर्ज किया गया। अब 18 मई 2026 को नई दिल्ली स्थित Constitution Club of India में आयोजित समारोह में एक बार फिर उन्हें सम्मानित किया जाएगा। राजकुमार सतनामी की जीवन यात्रा आज युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। गरीबी, मजदूरी, संघर्ष, आंदोलन और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को जिंदा रखा और समाज सेवा के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाई। जिस इंसान के इरादों में आग होती है, उसे रोकने की ताकत किसी हालात में नहीं होती।
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