मुंगेली / लोरमी । हिंदुस्तान दृष्टि । ग्राम पंचायत बैगाकापा में सामग्री खरीदी और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। प्राप्त जानकारी और उपलब्ध बिलों के अध्ययन के बाद पंचायत की खरीद प्रक्रिया, भुगतान व्यवस्था और दस्तावेजी पारदर्शिता को लेकर चर्चा तेज हो गई है। मिली जानकारी के अनुसार पंचायत में विभिन्न सामग्रियों की खरीदी के नाम पर भुगतान किए जाने के दस्तावेज उपलब्ध हुए हैं। खरीद संबंधी जानकारी मांगे जाने पर पंचायत द्वारा भुगतान संबंधी अभिलेख उपलब्ध कराए गए, लेकिन खरीद की स्वीकृति से संबंधित पंचायत प्रस्ताव की प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि संबंधित सामग्री की खरीदी किस प्रस्ताव और किस पंचायत बैठक की स्वीकृति के आधार पर की गई। मामले में एक अन्य महत्वपूर्ण तथ्य GST से जुड़ा हुआ है। उपलब्ध बिलों में कुछ स्थानों पर GST नंबर का उल्लेख नहीं दिखाई देता, जबकि कुछ बिल में संबंधित फर्म का GSTIN अंकित है। इसके बावजूद बिल में CGST, SGST, कर की दर तथा कर राशि का पृथक विवरण स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं है। इससे यह प्रश्न उठ रहा है कि खरीद प्रक्रिया में उपयोग किए गए बिल GST नियमों के अनुरूप हैं या नहीं। इसी प्रकार पंचायत की रोकड़ बही में भी संबंधित भुगतान का उल्लेख केवल फर्म के नाम और भुगतान राशि के रूप में दर्ज बताया जा रहा है। उपलब्ध अभिलेखों में GST से संबंधित अलग प्रविष्टि नहीं। हालांकि वित्तीय जानकारों का मानना है कि केवल GST विवरण नहीं होने से किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता स्वतः सिद्ध नहीं होती, लेकिन यह जांच और स्पष्टीकरण का विषय अवश्य बनता है। जागरूक नागरिक का कहना है कि जब सार्वजनिक धन खर्च किया जाता है, तब खरीद प्रस्ताव, सामग्री का विवरण, भुगतान वाउचर, स्टॉक रजिस्टर और मूल बिल जैसे दस्तावेजों का व्यवस्थित एवं पारदर्शी होना आवश्यक है। यदि खरीद प्रस्ताव की प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई है, तो यह जानना जरूरी है कि सामग्री खरीदी की स्वीकृति किस प्रक्रिया के तहत दी गई थी।
मांगी गई जानकारी के जवाब में डाक द्वारा भेजे गए पत्र में 1000 रुपये जमा कर प्रमाणित प्रतिलिपि हेतु प्राप्त करने की उल्लेख किया गया है, लेकिन प्रमाणित प्रतिलिपि प्राप्त करने उपस्थित हुआ तो 300 रुपए प्राप्त कर 150 पेज की जानकारी दिया गया है, जिसमें असंतुष्टि व्यक्त किया गया था। अरविंद कुमार ने मांग की है कि संबंधित खरीद प्रक्रिया, भुगतान अभिलेख, स्टॉक रजिस्टर, मूल बिल, GST रिकॉर्ड तथा पंचायत बैठक की कार्यवाही की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और किसी भी प्रकार की शंका का समाधान हो सके। उठ रहे प्रमुख सवाल खरीद संबंधी पंचायत प्रस्ताव की प्रति मांगी गई प्रमाणित दस्तावेजों में क्यों उपलब्ध नहीं कराई गई?
सामग्री खरीदी की स्वीकृति किस बैठक में दी गई?
GST पंजीकृत फर्म के बिल में CGST, SGST और कर राशि का स्पष्ट विवरण क्यों नहीं है?
पंचायत ने भुगतान किस प्रकार के बिल के आधार पर स्वीकृत किया?
खरीदी गई सामग्री का रिकॉर्ड स्टॉक रजिस्टर में दर्ज है या नहीं?
अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब खरीद की स्वीकृति से संबंधित प्रस्ताव की प्रति उपलब्ध नहीं है और बिलों में भी आवश्यक कर विवरण स्पष्ट नहीं दिख रहे हैं, तो पंचायत की खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता और दस्तावेजी वैधता को कैसे सुनिश्चित किया गया?
यह समाचार मांगी गई प्रमाणित दस्तावेजों के तहत प्राप्त जानकारी, उपलब्ध बिलों एवं अभिलेखों के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी प्रकार की अनियमितता की पुष्टि सक्षम जांच के बाद ही संभव होगी।
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