मुंगेली । हिन्दुस्तान दृष्टि । जिले के सरगांव थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पेण्ड्री 'स' में हुए तुलसी साहू हत्याकांड का मुंगेली पुलिस ने खुलासा कर दिया है। वर्ष 2025 में हुए सरपंच चुनाव में हार की रंजिश इस सनसनीखेज हत्याकांड की वजह बनी। पुलिस के अनुसार, चुनाव में हारने के बाद मुख्य आरोपी धनीराम साहू को संदेह था कि मतगणना के दौरान तुलसी साहू ने कुछ वोट जानबूझकर निरस्त करवाए थे, जिसके कारण उसे हार का सामना करना पड़ा। इसी रंजिश में उसने तुलसी साहू की हत्या की साजिश रची और अपहरण के लिए 1 लाख 20 हजार रुपये में सुपारी तय की थी। मामले में थाना सरगांव एवं साइबर सेल की संयुक्त टीम ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, 25 अक्टूबर 2026 की शाम लगभग 7 बजे तुलसी साहू (32 वर्ष) अपने घर से सरगांव स्थित अपनी दीदी के घर जाने के लिए निकले थे। वहां से उन्हें अपने जीजा के साथ बेलगहना जाना था, लेकिन वह न तो सरगांव पहुंचे और न ही घर वापस लौटे। उनका मोबाइल फोन भी बंद आने लगा। परिजनों ने तलाश शुरू की तो उनकी मोटरसाइकिल क्रमांक CG 28 P 5824 ग्राम पेण्ड्री 'स' स्थित जय भोलेनाथ राइस मिल के पास मिली। इसके बाद तलाश करने पर गणेश मिनरल्स के पास सड़क किनारे अपशिष्ट पानी से बने कीचड़ में कांटेदार झाड़ियों के बीच उनका शव संदिग्ध अवस्था में मिला। 26 अक्टूबर को सूचना मिलने पर सरगांव पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पोस्टमार्टम एवं फॉरेंसिक जांच में गला घोंटकर हत्या किए जाने तथा मृतक के दोनों पैरों को बिजली के तार से बांधने की बात सामने आई। इसके बाद पुलिस ने अपराध क्रमांक 166/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 एवं 238 में मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की।
पुलिस की विवेचना में सामने आया कि ग्राम पेण्ड्री 'स' निवासी धनीराम साहू वर्ष 2025 में हुए सरपंच चुनाव में लगभग 8-9 वोटों से हार गया था। इस चुनाव में झुलुराम वर्मा सरपंच निर्वाचित हुए थे और मृतक तुलसी साहू उनके मतगणना अभिकर्ता के रूप में कार्य कर रहे थे। धनीराम को संदेह था कि तुलसी साहू ने मतगणना के दौरान जानबूझकर कुछ वोट निरस्त करवाए थे, जिसके कारण उसे चुनाव में हार मिली। इसी बात को लेकर वह तुलसी साहू से रंजिश रखने लगा था और उसकी हत्या की योजना बना रहा था।
पुलिस के मुताबिक, हत्या की साजिश को अंजाम देने के लिए धनीराम साहू ने अपने साले भुवन साहू को साथ लिया। इसके बाद ओमनारायण राजपूत के माध्यम से बिलासपुर जिले के कोटा निवासी सुरेंद्र जोशी से संपर्क किया गया। तुलसी साहू का अपहरण करने के लिए 1 लाख 20 हजार रुपये में सौदा तय हुआ था। इसमें से 70 हजार रुपये अग्रिम दिए गए थे। योजना के तहत तुलसी साहू का अपहरण कर उन्हें धनीराम और उसके सहयोगियों तक पहुंचाना था। इसके बाद चुनाव में कथित धांधली स्वीकार करने संबंधी बयान स्टाम्प पेपर पर लिखवाकर उसका वीडियो बनाने और फिर हत्या करने की साजिश रची गई थी। पुलिस जांच के अनुसार, 25 अक्टूबर की शाम सुरेंद्र जोशी अपने साथी कुणाल बक्शी और तीन अन्य साथियों के साथ निशान कार क्रमांक CG 10 CE 2075 से ग्राम पेण्ड्री 'स' पहुंचे। रात करीब 7 बजे तुलसी साहू जब मोटरसाइकिल से निकले, तब आरोपियों ने उनका पीछा किया और जय भोलेनाथ राइस मिल से लगभग 100 मीटर पहले सुनसान सड़क पर उनकी मोटरसाइकिल रुकवाकर जबरन कार में बैठा लिया। इसके बाद आरोपियों ने तुलसी साहू को लेकर मनियारी सरगांव के पास धनीराम साहू और उसके साले भुवन साहू से संपर्क किया। सभी टीकाराम साहू निवासी मोहभट्ठा के खेत में स्थित ट्यूबवेल के पास पहुंचे। यहां सुरेंद्र जोशी और उसके साथी तुलसी साहू तथा उनका मोबाइल धनीराम को सौंपकर वहां से चले गए। पुलिस के अनुसार, धनीराम और भुवन साहू तुलसी साहू को पंप हाउस के अंदर ले गए। वहां उन्हें डराकर 100 रुपये के स्टाम्प पेपर पर चुनाव में कथित गड़बड़ी स्वीकार करने संबंधी शपथ पत्र लिखवाया गया। इस दौरान भुवन साहू के मोबाइल से वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई। इसके बाद दोनों ने पंप हाउस में रखे बिजली के तार से तुलसी साहू के पैर बांध दिए और गमछे से गला घोंटकर उनकी हत्या कर दी। हत्या के बाद साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से ओमनारायण राजपूत को फोन कर बुलाया गया। पुलिस के मुताबिक, तीनों आरोपियों ने मिलकर शव को मोटरसाइकिल पर ले जाकर गणेश मिनरल्स से निकलने वाले अपशिष्ट पानी के कीचड़ में सड़क किनारे फेंक दिया और कांटेदार झाड़ियों से ढक दिया। इसके अलावा मृतक के जूते, जैकेट और मोबाइल चार्जर को पंप हाउस के पास स्थित पोल्ट्री फार्म के शेड में छिपाया गया, जबकि मोबाइल फोन को राकिंग ढाबा के पीछे खेत में फेंक दिया गया। घटना में इस्तेमाल गमछे को जलाकर साक्ष्य मिटाने का प्रयास भी किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज रामगोपाल गर्ग के निर्देशन एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल के मार्गदर्शन में विशेष टीम गठित की गई थी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत शुक्ला के पर्यवेक्षण और उप पुलिस अधीक्षक हरविंदर सिंह के नेतृत्व में थाना सरगांव एवं साइबर सेल की संयुक्त टीम ने तकनीकी साक्ष्यों, मुखबिर सूचना और विवेचना के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई। पुलिस ने धनीराम साहू, भुवन साहू, ओम उर्फ ओमनारायण राजपूत, सुरेंद्र जोशी और टीकाराम साहू को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों को 30 अक्टूबर 2026 को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड के लिए न्यायालय में पेश किया गया। प्रकरण में अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों में धनीराम साहू (40 वर्ष), निवासी पेण्ड्री 'स', थाना सरगांव, भुवन साहू (28 वर्ष), निवासी किरना, थाना सरगांव, ओम उर्फ ओमनारायण राजपूत (25 वर्ष), निवासी पेण्ड्री 'स', थाना सरगांव, सुरेंद्र जोशी (25 वर्ष), निवासी दर्रीकापा, थाना कोटा, जिला बिलासपुर तथा टीकाराम साहू (53 वर्ष), निवासी मोहभट्ठा, थाना सरगांव शामिल हैं। आरोपियों की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त बिजली के तार के टुकड़े, मृतक के जूते, जैकेट, मोबाइल चार्जर, मोबाइल फोन, स्टाम्प पेपर, स्टाम्प पर लिखते हुए बनाया गया वीडियो, घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल, निशान कार क्रमांक CG 10 CE 2075 तथा सुपारी की रकम में से शेष 10 हजार रुपये नगद जब्त किए गए हैं। अंधेकत्ल के इस मामले का खुलासा करने पर पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज रामगोपाल गर्ग ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों को नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है। इस कार्रवाई में निरीक्षक अशोक यादव, प्र. उपनिरीक्षक नवनीत नावेलकर, उपनिरीक्षक सत्येंद्रपुरी गोस्वामी, उपनिरीक्षक महेश मिश्रा, सउनि निर्मल घोष, धर्मेंद्र शर्मा, प्रधान आरक्षक नोखेलाल कुर्रे, यशवंत डाहिरे, नरेश यादव, अशोक कौशिक, रवि जांगड़े, आरक्षक राहुल यादव, भेषज पाण्डेकर, परमेश्वर जांगड़े, राहुलकांत कश्यप, राकेश बंजारे, अतुल ठाकुर, हेमसिंह ठाकुर, रामकिशोर कश्यप, बसंत डाहिरे, रिपीन बनर्जी, अजय रावत, विश्वनाथ सिंह, पंकज निर्णेजक एवं अनिल मरावी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
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