बेमेतरा,नवागढ़ । हिंदुस्तान दृष्टि । लोगों के घरों और आसपास निकलने वाले जहरीले सांपों को पकड़कर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने वाले नवागढ़ के जाने-माने स्नेक कैचर मनीष पाटिल की सर्पदंश से मौत हो गई। बेमेतरा जिले के मुरता गांव में देर रात स्नेक रेस्क्यू के दौरान एक कोबरा ने उन्हें डस लिया। गंभीर हालत में उन्हें पहले नवागढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बिलासपुर स्थित सिम्स अस्पताल रेफर किया गया। उपचार के दौरान मनीष ने दम तोड़ दिया। बताया गया है कि शुक्रवार देर रात करीब 12 बजे मुरता गांव के एक घर में सांप निकलने की सूचना डायल-112 को मिली थी। सूचना के बाद 112 की टीम मनीष पाटिल को अपने साथ लेकर मौके पर पहुंची। मनीष ने सांप को रेस्क्यू करने की प्रक्रिया शुरू की। इसी दौरान जब वे सांप को एक डिब्बे में डालने का प्रयास कर रहे थे, तभी सांप ने अचानक हमला कर उन्हें डस लिया। हादसे के बाद उनकी हालत बिगड़ने लगी और उन्हें तत्काल उपचार के लिए नवागढ़ सीएचसी ले जाया गया।
रेस्क्यू का वीडियो आया सामने, आखिरी पल कैमरे में कैद
इस दर्दनाक घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में मनीष सांप को काबू कर उसे डिब्बे में डालने का प्रयास करते दिखाई दे रहे हैं। इसी दौरान सांप अचानक उनकी ओर झपटता है और उन्हें डस लेता है। हादसे का यह दृश्य बेहद भयावह है। वीडियो सामने आने के बाद स्नेक रेस्क्यू के दौरान अपनाई जाने वाली सुरक्षा व्यवस्था और प्रशिक्षण को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। वायरल वीडियो में मनीष के हाथों में किसी विशेष सुरक्षा उपकरण के इस्तेमाल का स्पष्ट रूप से नजर नहीं आना चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, केवल वीडियो के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि दुर्घटना केवल सुरक्षा उपकरण नहीं पहनने के कारण हुई।
सुरक्षा उपकरण और प्रशिक्षित रेस्क्यू की जरूरत
जहरीले सांपों का रेस्क्यू बेहद जोखिम भरा काम है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में व्यक्ति को सांप की प्रजाति, उसके व्यवहार और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की तकनीक का पर्याप्त प्रशिक्षण होना चाहिए। रेस्क्यू के दौरान हाथों से सीधे सांप को पकड़ने के बजाय परिस्थितियों के अनुसार स्नेक हुक, उचित रेस्क्यू उपकरण, सुरक्षा जूते/बूट और अन्य उपयुक्त सुरक्षात्मक साधनों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
हालांकि यह भी समझना जरूरी है कि कोई भी सुरक्षा उपकरण सर्पदंश का जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं करता। सबसे महत्वपूर्ण बात प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा उचित उपकरण और सुरक्षित तकनीक के साथ रेस्क्यू करना है।
मनीष के मामले में वायरल वीडियो ने इसी पहलू को लेकर गंभीर सवाल खड़ा किया है कि क्या रेस्क्यू के दौरान पर्याप्त सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा था? क्या डायल-112 जैसी आपातकालीन टीमों के साथ स्नेक रेस्क्यू के लिए जाने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए कोई निर्धारित व्यवस्था है? और क्या जहरीले सांपों के रेस्क्यू के दौरान प्रशिक्षित व्यक्ति को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं?
सैकड़ों सांपों का कर चुके थे रेस्क्यू
मनीष पाटिल नवागढ़ क्षेत्र में लंबे समय से स्नेक रेस्क्यू का काम कर रहे थे। घर, खेत और रिहायशी इलाकों में सांप निकलने की सूचना मिलने पर वे मौके पर पहुंचते और सांपों को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर छोड़ने का काम करते थे। स्थानीय स्तर पर उनके रेस्क्यू कार्य की पहचान इतनी मजबूत थी कि अगस्त 2024 में नवागढ़ तहसीलदार विनोद बंजारे ने उनके योगदान के लिए उन्हें सम्मानित किया था और 2100 रुपये की नगद राशि भी दी थी। लंबे समय से सांपों को रेस्क्यू करने के अनुभव के बावजूद इस बार हुआ हादसा उनकी जिंदगी पर भारी पड़ गया। यही वजह है कि उनके निधन ने क्षेत्र के लोगों को झकझोर दिया है।
नवागढ़ से सिम्स तक चला इलाज, नहीं बची जान
सर्पदंश के बाद मनीष की हालत बिगड़ने पर उन्हें नवागढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। वहां उपचार के बाद गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें बिलासपुर के सिम्स अस्पताल रेफर किया गया। लेकिन चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। पोस्टमार्टम के बाद उनका अंतिम संस्कार स्थानीय मुक्तिधाम में किया गया।
मनीष की मौत के बाद परिजनों की ओर से समय पर समुचित उपचार नहीं मिलने का आरोप भी लगाया गया है। हालांकि, उपचार में देरी या चिकित्सकीय लापरवाही के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए इस पहलू की वास्तविक स्थिति संबंधित स्वास्थ्य विभाग या जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
मौत ने खड़े किए कई सवाल
मनीष पाटिल की मौत सिर्फ एक स्नेक कैचर की मौत नहीं, बल्कि ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में होने वाले स्नेक रेस्क्यू की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है।
क्या स्नेक रेस्क्यू करने वाले लोगों का नियमित प्रशिक्षण होता है?
क्या उन्हें आवश्यक रेस्क्यू उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं?
क्या डायल-112 जैसी आपातकालीन सेवाओं के साथ जाने वाले स्नेक कैचर के लिए कोई सुरक्षा प्रोटोकॉल निर्धारित है?
सर्पदंश की स्थिति में नजदीकी अस्पताल में एंटी-स्नेक वेनम और आवश्यक आपातकालीन उपचार की उपलब्धता कितनी है?
ये सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि WHO के अनुसार जहरीले सांप के काटने के बाद तत्काल चिकित्सा सुविधा तक पहुंचना और उपयुक्त एंटीवेनम उपचार उपलब्ध होना जीवन बचाने में महत्वपूर्ण है। सर्पदंश के मामले में मरीज को शांत रखते हुए उसकी गतिविधि सीमित करने और बिना देरी अस्पताल पहुंचाने की सलाह दी जाती है।
एक रक्षक की मौत से क्षेत्र में शोक
जिस मनीष पाटिल के पहुंचते ही सांप के डर से परेशान परिवारों को राहत मिलती थी, आज उसी स्नेक कैचर की मौत ने नवागढ़ क्षेत्र को गमगीन कर दिया है। वर्षों तक दूसरों को सर्पदंश के खतरे से बचाने वाले मनीष इस बार उसी खतरे का शिकार हो गए। उनकी मौत ने यह संदेश भी दिया है कि सांपों का रेस्क्यू साहस का काम जरूर है, लेकिन केवल साहस पर्याप्त नहीं प्रशिक्षण, उचित उपकरण, सुरक्षित दूरी और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है।
अब सवाल यह है कि मनीष की मौत के बाद क्या संबंधित प्रशासन स्नेक रेस्क्यू करने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस व्यवस्था करेगा, ताकि भविष्य में किसी और रक्षक को अपनी जान न गंवानी पड़े?
वीडियो देखें
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