मुंगेली नगर पालिका में विकास बनाम विवाद: आगर खेल परिसर से करोड़ों के शिलान्यास, फिर PIC पर टकराव और अब अध्यक्ष के सम्मान का सवाल, भाजपा सरकार के बाद विकास कार्यों की बड़ी तस्वीर, लेकिन अध्यक्ष-उपाध्यक्ष की राजनीतिक खींचतान और PIC विवाद ने खड़े किए सवाल, कांग्रेस ने घेरा नगर पालिका 13 सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर दी 15 दिन की मोहलत, मुंगेली नगर पालिका में PIC का पेंच बरकरार शासन के मार्गदर्शन का इंतजार, अध्यक्ष के सम्मान से लेकर गौरव पथ तक, कांग्रेस के सवालों पर CMO का जवाब


अरविंद कुमार, एडिटर इन चीफ 
मुंगेली । हिंदुस्तान दृष्टि । मुंगेली नगर पालिका की मौजूदा तस्वीर को पिछले करीब डेढ़ वर्ष के घटनाक्रम से जोड़कर देखें तो एक ओर करोड़ों रुपये के विकास कार्यों के लोकार्पण, भूमिपूजन और घोषणाओं की तस्वीर सामने आती है, वहीं दूसरी ओर अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के राजनीतिक समीकरण, PIC गठन को लेकर विवाद और अब निर्वाचित अध्यक्ष के सम्मान व अधिकारों का मुद्दा भी चर्चा में है। ऐसे में सवाल यह है कि नगर पालिका की राजनीति आखिर विकास की दिशा में आगे बढ़ रही है या राजनीतिक खींचतान में उलझती जा रही है।
प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद मुंगेली नगर पालिका क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर कई बड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें आगर खेल परिसर प्रमुख केंद्र के रूप में सामने आया। 19 नवंबर 2025 को उपमुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव ने मुंगेली नगर पालिका क्षेत्र में करीब 29 करोड़ 90 लाख रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। इनमें 17 करोड़ 55 लाख 12 हजार रुपये के 91 कार्यों का लोकार्पण तथा 12 करोड़ 41 लाख 79 हजार रुपये के 23 कार्यों का भूमिपूजन शामिल था।

आगर खेल परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में शहर के अलग-अलग वार्डों से जुड़े कई विकास कार्यों को शामिल किया गया। बालानी चौक में माता परमेश्वरी चौक सौंदर्यीकरण, अधिकारी-कर्मचारी आवास निर्माण, मां परमेश्वरी चौक और देवांगन मुक्तिधाम में हाईमास्ट लाइट, भक्त माता कर्मा चौक एवं प्रतिमा स्थापना, साहूपारा सामुदायिक भवन, निरंजन प्रसाद केशरवानी बाल वाटिका का जीर्णोद्धार, आगर खेल परिसर का जीर्णोद्धार, पड़ाव चौक में महाराणा प्रताप की कांस्य प्रतिमा तथा विप्र समाज के सामुदायिक भवन जैसे कार्यों का भूमिपूजन किया गया। इसके अलावा 15वें वित्त आयोग एवं अधोसंरचना मद से सीसी सड़क, आरसीसी नाली, बाउंड्रीवाल और विद्युतीकरण सहित 76 कार्यों के लोकार्पण का भी उल्लेख किया गया।

इससे पहले 3 जनवरी 2025 को भी आगर खेल परिसर में बड़ा विकास कार्यक्रम आयोजित हुआ था। सरकारी एवं मीडिया रिपोर्टों में इस दौरान 36 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों के लोकार्पण-भूमिपूजन का उल्लेख किया गया। इसमें नवीन नगर पालिका भवन, गौरव पथ उन्नयन, स्वीमिंग पूल, स्वागत द्वार, बुधवारी बाजार, पुष्प वाटिका, विभिन्न वार्डों में सीसी सड़क-नाली और मुक्तिधाम उन्नयन जैसे कार्य शामिल थे। इसी कार्यक्रम में हाईटेक बस स्टैंड के लिए 6.20 करोड़ रुपये और नालंदा परिसर के लिए 4.41 करोड़ रुपये सहित कई नए कार्यों की घोषणाएं भी सामने आई थीं। आगर खेल मैदान के जीर्णोद्धार के लिए 1.10 करोड़ रुपये, भक्त माता कर्मा चौक के लिए 30 लाख रुपये और साहूपारा सामुदायिक भवन के लिए 25 लाख रुपये जैसी घोषणाएं भी की गई थीं। नवंबर 2025 के सरकारी जनसंपर्क विभाग के अनुसार, उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने यह भी बताया था कि पिछले 20 महीनों में अलग-अलग योजनाओं के तहत मुंगेली नगर पालिका के लिए 92 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी जा चुकी है।
यानी विकास के आंकड़ों और सरकारी घोषणाओं की तस्वीर बड़ी है। लेकिन किसी भी विकास योजना की असली सफलता शिलान्यास या लोकार्पण के मंच से नहीं, बल्कि उसके धरातल पर पूरा होने और जनता को उसका लाभ मिलने से तय होती है।

यहीं से मुंगेली नगर पालिका की राजनीतिक कहानी का दूसरा पक्ष सामने आता है।
मार्च 2025 में नई नगर पालिका परिषद अस्तित्व में आई और कांग्रेस के रोहित शुक्ला अध्यक्ष निर्वाचित हुए। वहीं उपाध्यक्ष पद भाजपा के जयप्रकाश मिश्रा के खाते में गया। उपाध्यक्ष चुनाव का परिणाम उस समय इसलिए चर्चा में आया क्योंकि अध्यक्ष सहित कांग्रेस के पास 12 मतों का संख्याबल बताया गया था, जबकि भाजपा के पास निर्दलीय समर्थन सहित 11 मत थे। इसके बावजूद जयप्रकाश मिश्रा को 13 मत मिले, कांग्रेस प्रत्याशी अरविंद वैष्णव को 9 मत मिले और एक मत निरस्त हुआ। यानी बहुमत के घोषित गणित से अलग परिणाम सामने आया। कांग्रेस की ओर से क्रॉस वोटिंग के आरोप लगाए गए, जबकि भाजपा के लिए यह परिणाम राजनीतिक रणनीति और प्रबंधन की सफलता के रूप में देखा गया।
राजनीतिक दृष्टि से भाजपा के लिए उपाध्यक्ष पद हासिल करना केवल एक पद की जीत नहीं माना जा सकता। नगर पालिका के भीतर उपाध्यक्ष और PIC की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या भाजपा ने परिषद के भीतर अपना प्रभाव मजबूत कर विकास के एजेंडे को साधने की रणनीति बनाई थी? यदि ऐसा था तो अब जनता परिणाम देखना चाहेगी। कितने विकास कार्य पूरे हुए? कितने निर्माणाधीन हैं? कितने कार्य अभी प्रक्रिया में हैं? और जिन कार्यों की घोषणा हुई, उनमें से कितने वास्तव में जमीन पर दिखाई दे रहे हैं? क्योंकि राजनीतिक कुर्सी हासिल करना एक बात है और उस कुर्सी के माध्यम से शहर का विकास करना दूसरी बात।

इसके बाद नगर पालिका में PIC का मुद्दा सामने आया। जनवरी 2026 में PIC गठन के बाद करीब 24 घंटे के भीतर कई पार्षदों के इस्तीफे की खबर सामने आई। वरिष्ठ पार्षद अरविन्द वैष्णव, अजय साहू, दिलीप सोनी, संजय चंदेल, प्रतिमा कोशले और राम किशोर देवांगन के नाम इस्तीफा देने वाले पार्षदों में बताए गए। यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि PIC का उद्देश्य परिषद के कामकाज और निर्णय प्रक्रिया को व्यवस्थित करना है, लेकिन गठन के तुरंत बाद ही असहमति और इस्तीफे की स्थिति सामने आने से परिषद के भीतर राजनीतिक समन्वय पर सवाल उठे। क्या PIC गठन से पहले सभी पार्षदों को विश्वास में लिया गया था? क्या सदस्यों के चयन को लेकर असहमति थी? या फिर इसके पीछे कोई अन्य राजनीतिक कारण था? इन सवालों का स्पष्ट जवाब सार्वजनिक रूप से सामने आना अभी भी जरूरी है।
इसके बाद मार्च 2026 में PIC गठन को लेकर अध्यक्ष रोहित शुक्ला की नाराजगी की खबर सामने आई। इससे सवाल और गंभीर हो गया कि यदि जनवरी में PIC गठित हुई थी, तो मार्च में उसके गठन को लेकर फिर सवाल क्यों उठे?
यानी PIC की वास्तविक स्थिति क्या रही, गठन कितना प्रभावी रहा और परिषद के निर्णयों में उसकी भूमिका किस तरह रही यह पूरी स्थिति अब भी स्पष्ट किए जाने की जरूरत है।

अब 7 अक्टूबर 2026 को शहर कांग्रेस कमेटी ने नगर पालिका की विभिन्न समस्याओं को लेकर सीएमओ को ज्ञापन सौंपा है। इसमें सड़क, नाली, सफाई, स्ट्रीट लाइट, प्रधानमंत्री आवास योजना की लंबित राशि, गौरव पथ की गुणवत्ता, कथित अवैध कब्जे सहित कई मुद्दों के साथ PIC गठन और निर्वाचित अध्यक्ष के अधिकार एवं सम्मान का मुद्दा भी उठाया गया है। कांग्रेस का कहना है कि निर्वाचित अध्यक्ष के अधिकारों और सम्मान का संरक्षण होना चाहिए तथा PIC गठन की प्रक्रिया नियमानुसार जल्दी पूरी की जानी चाहिए।
यह मांग लोकतांत्रिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यदि जनता ने अध्यक्ष को चुना है तो निश्चित रूप से उनके अधिकार और सम्मान का संरक्षण होना चाहिए। लेकिन इसी के साथ कांग्रेस से भी सवाल बनता है कि जिस PIC को लेकर आज अध्यक्ष के सम्मान की बात की जा रही है, उसके गठन के समय परिषद के भीतर इतनी असहमति क्यों सामने आई थी?
अध्यक्ष का सम्मान जरूरी है, लेकिन नगर पालिका के प्रत्येक निर्वाचित पार्षद की भागीदारी और सम्मान भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

भाजपा से सवाल है कि उपाध्यक्ष पद हासिल करने और सरकार की ओर से करोड़ों रुपये की विकास स्वीकृतियां मिलने के बाद नगर पालिका के भीतर विकास को कितनी गति मिली? यदि उपाध्यक्ष की राजनीतिक भूमिका नगर के विकास को साधने के लिए थी, तो अब उसका परिणाम सड़क, नाली, प्रकाश व्यवस्था, सफाई और अन्य नागरिक सुविधाओं में दिखाई देना चाहिए। कांग्रेस से सवाल है कि अध्यक्ष पद मिलने के बावजूद परिषद के भीतर ऐसा राजनीतिक और प्रशासनिक समन्वय क्यों नहीं बन पाया कि PIC गठन जैसे विषय विवाद का कारण बनें? यदि अध्यक्ष के अधिकार और सम्मान की बात की जा रही है, तो परिषद के भीतर सभी पार्षदों के साथ संवाद और सहभागिता भी दिखाई देनी चाहिए। नगर पालिका प्रशासन से भी सवाल है कि राजनीतिक मतभेदों के बीच प्रशासनिक प्रक्रिया कितनी निष्पक्ष और पारदर्शी रही और अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तथा पार्षदों के अधिकारों के बीच संतुलन किस तरह बनाया गया? आज मुंगेली के सामने सबसे बड़ा सवाल यह नहीं होना चाहिए कि अध्यक्ष कांग्रेस का है या उपाध्यक्ष भाजपा का। सबसे बड़ा सवाल यह होना चाहिए कि करोड़ों रुपये की स्वीकृतियों और विकास कार्यों का वास्तविक लाभ शहर के नागरिकों को कितना मिला। गौरव पथ की गुणवत्ता पर सवाल हैं। वार्डों में सड़क और नाली की समस्याएं हैं। स्ट्रीट लाइट और सफाई की समस्याएं हैं। प्रधानमंत्री आवास के हितग्राहियों की लंबित राशि का मुद्दा है। अवैध कब्जों की शिकायतें हैं और अब PIC तथा अध्यक्ष के सम्मान का राजनीतिक विवाद भी सामने है।

ऐसे में आगर खेल परिसर में हुए बड़े-बड़े भूमिपूजन और लोकार्पण पर सवाल है, कितने कार्य पूरे हुए? कितने अधूरे हैं? कितने निर्माणाधीन हैं? कितने कार्यों की गुणवत्ता संतोषजनक है? कितने कार्यों का उपयोग आम नागरिक कर रहे हैं? और कितनी घोषणाएं अभी फाइलों तक सीमित हैं?
यही आंकड़े बताएंगे कि आगर खेल परिसर से शुरू हुई विकास की तस्वीर वास्तव में मुंगेली की गलियों तक कितनी पहुंची। मुंगेली नगर पालिका में आज स्थिति यह है कि अध्यक्ष कांग्रेस का है, उपाध्यक्ष भाजपा का है, प्रदेश में भाजपा की सरकार है, नगर पालिका के लिए करोड़ों रुपये की स्वीकृतियों और विकास कार्यों की तस्वीर सामने है, लेकिन दूसरी ओर नगर पालिका की राजनीति PIC और अधिकारों के सवाल पर उलझी हुई दिखाई देती है। यदि भाजपा ने उपाध्यक्ष पद के माध्यम से नगर पालिका में अपना राजनीतिक प्रभाव मजबूत किया था, तो अब उसे विकास के परिणाम दिखाने होंगे। वहीं यदि कांग्रेस अध्यक्ष के सम्मान और अधिकार की लड़ाई लड़ रही है, तो उसे भी यह साबित करना होगा कि अध्यक्ष के नेतृत्व में परिषद पारदर्शी, सहभागी और जवाबदेह तरीके से चल सकती है।

अंततः मुंगेली की नगर सरकार किसी एक दल या व्यक्ति की नहीं, बल्कि शहर की जनता की है। अध्यक्ष कांग्रेस का हो या उपाध्यक्ष भाजपा का, विकास की जिम्मेदारी दोनों की है। राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन यदि ये मतभेद विकास के रास्ते में बाधा बनते हैं तो इसका नुकसान किसी पार्टी को नहीं, बल्कि सीधे मुंगेली के नागरिकों को होता है। आज कांग्रेस अध्यक्ष के सम्मान की बात कर रही है। भाजपा उपाध्यक्ष की भूमिका और अपने राजनीतिक प्रभाव की बात कर सकती है। लेकिन जनता दोनों से एक ही सवाल पूछेगी अपने-अपने पद के सम्मान के लिए आपने कितना संघर्ष किया और मुंगेली शहर के सम्मान और विकास के लिए कितना काम किया?

अब 7 अक्टूबर के ज्ञापन के बाद कांग्रेस ने 15 दिन में कार्रवाई की मांग की है और कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। ऐसे में आने वाले दिन यह तय करेंगे कि नगर पालिका प्रशासन PIC, अध्यक्ष के अधिकार और शहर की मूलभूत समस्याओं पर क्या कदम उठाता है। क्योंकि मुंगेली को शिलान्यास की तस्वीर नहीं, धरातल पर पूरा हुआ विकास चाहिए। और अब सबसे बड़ा सवाल यही है आगर खेल परिसर में करोड़ों के विकास कार्यों के शिलान्यास से लेकर आज अध्यक्ष के सम्मान के मुद्दे तक, मुंगेली की नगर सरकार आखिर कुर्सी की राजनीति को साध रही है या शहर के विकास को?

मुंगेली नगर पालिका परिषद के CMO ने बताया कि दीपक गुप्ता शहर अध्यक्ष के नेतृत्व में 13 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा गया है ज्ञापन का अवलोकन किया हूं, अधिकांश समस्या निराकरण हो गया है, श्रद्धांजलि योजना में भुगतान होने की दी जानकारी, अध्यक्ष का सम्मान है , अध्यक्ष का सम्मान को हम नहीं घटा सकते, पेंडारा कापा में कोई निर्माण नहीं हुआ है, PIC गठन पर हमने शासन को मार्गदर्शन लिखा हुआ है मार्गदर्शन प्राप्त होने पर कार्यवाही करेंगे, प्रधानमंत्री आवास का लंबित राशि हमारे स्तर पर कुछ भी नहीं है आजकल एसीसीज (ऑनलाइन) माध्यम से होता है, गौरव पथ में निश्चित तौर पर विलंब हुआ है समय सीमा पूर्ण हो चुका है और डामरीकरण 15 अक्टूबर के बाद से होता है उस पर कटौती पेनाल्टी हम करेंगे, विकास कार्य में धीमी है उस पर पेनाल्टी करेंगे उस पर, 3 सालों से अवैध प्लाटिंग पर नोटिस नोटिस होने की पत्रकारों द्वारा जानकारी लेने पर विधिक तौर पे कार्यवाही कर रहे है निश्चित तौर पर आगे भी कार्यवाही जारी रहेगी, सीएमओ द्वारा यह जानकारी दी है ।

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